
✍️ नशा — एक धीमा ज़हर
लेखक: साजिद राजधानी (पत्रकार) नशा किसी को अचानक बर्बाद नहीं करता…पहले आदत बनता है,फिर ज़रूरत बनता है,और आखिर में ज़िंदगी बनकर ज़िंदगी ही खत्म कर देता है।आज हमारे समाज का सबसे खतरनाक दुश्मन बेरोज़गारी नहीं,गरीबी नहीं…नशा है।एक लड़का जो कभी घर की उम्मीद होता है,धीरे-धीरे घर का डर बन जाता











